हमारा रिश्ता कुछ ऐसा गहरा था,
वो आईना थी और मैं चेहरा था।
वो मेरे हँसी में दर्द को देख लेती,
मैं अंदर कितना टूटा, बिखरा था।
मैं उससे दूर तो हो गया लेकिन,
साँसों पे उसका नाम ही ठहरा था।
उसके बाद जिसे देखा, उसको ढूँढा,
हर इक चेहरे में उसका चेहरा था।
कभी जो कहते थे हम साथ हैं तेरे,
वक़्त बदला तो जाना कौन मेरा था।
🖊️सुभाष कुमार यादव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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