जिन्दगी में निशानियों के मायने हम ना समझे।
हकीकत में दर्द से गुजरे तब अहमियत समझे।।
जो खुली आखों से दिखता उसी से तौलने देते।
छुपे प्रेम के ज़ख्म आसानी से यहाँ कौन समझे।।
खुद की दिवाली हँसी खुशी से एक बार गुजरी।
उस खुशनसीबी को भूले नही अहमियत समझे।।
यों अंदाजा लगाना किसी के बस में नही 'उपदेश'।
उजालों में अश्कों के सूखे दागों को खुदा समझे।।
किसी को नसीब से मोहब्बत का दामन मिलता।
ऐसे खुशनसीब की मुबारक दिवाली वही समझे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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