तेरी यादें सुबह से लेकर
पूरी जिंदगी को लुटा के ले गईं
न कोई जख़्म, न कोई मरहम है
सब तेरे लफ़्ज़ों में समाया है
शाम टूट गई, रात छूट कर चली गई
सुबह होते ही सिमट गई तेरी आवाज़
न कोई पहिया, न कोई बहिया
सब मेरी नज़रों में समाया है ।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
तेरी यादें सुबह से लेकर
पूरी जिंदगी को लुटा के ले गईं
न कोई जख़्म, न कोई मरहम है
सब तेरे लफ़्ज़ों में समाया है
शाम टूट गई, रात छूट कर चली गई
सुबह होते ही सिमट गई तेरी आवाज़
न कोई पहिया, न कोई बहिया
सब मेरी नज़रों में समाया है ।
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