श्रद्धांजली दिल से
कैसे अलविदा कहूं तुमको
तुम बसे हुए हो, मेरे तन मन में
कहो कैसे मैं जुदा करूं तुम को
अपने हर एक गीत व गजल से
मैं, कैसे अलविदा, कहूं तुम को
मैंने सांझा की, हर बात तुम से
नहीं जुदा थे ये जज्बात तुम से
हर एक दर्द सांझा किया है मैंने
हुई जब पहली मुलाकात तुमसे
किस से कहूंगा, मैं बात अपनी
मैं अब कैसे विदा करूं तुम को
जो खनखनाहट तेरी हंसी में थी
जो गर्माहट तेरे हंसी शब्दों में थी
दिलाती हैं रह-रह कर, तेरी याद
हर बार एक नई, बात कहती थी
तुम्हारी हर बात मे आर्द्र सर जी
मैं कैसे अब यूंही भुला दूं तुमको
गूंजती थी तेरी हरेक रचनाओं में
कभी गजल कभी, गीत बन कर
तुम्हारी चंचल शौख रचनाओं में
जैसे बजती हों शहनाई कहीं पर
इन सुलगती यादों, की चिता पर
बताओ कैसे विदा, करूं तुम को
- लेखराम यादव
( मौलिक रचना )
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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