उम्र के एक पड़ाव के बाद
खड़ी हो जाती हैं,
मुश्किलें बहरूपिया
बनकर..
हर रोज नजर आती हैं
चेहरे पे नई नई दरारें
और रिश्तों में दरकती
हैं संवेदनाएं..
दवा को अंधेरे में पहचान लेने
की काबिलियत हासिल कर
ली है
अब वो इस देह की जरूरत सी
बन गई है..
उनकी गंध से हो गई
है एक दोस्ती ..
लगता है अवधिपार भी
अब कुछ नुकसान नहीं करती..
और तकलीफ देते रिश्ते अब भी
अवधिपार होकर भी सालते है..
उम्र के एक पड़ाव के बाद..
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







