एक समय था
जब पतंगों से आसमाँ ढक जाया करता था,
दो तीन दिन पहले से ही
त्योहारों के आगमन की तैयारी शुरू हो जाती थी,
संक्रांति के दिन
सुबह से ही घरों की छतों पर रौनक रहती थी।
बदलते समय ने
त्योहारों को भी औपचारिक बना दिया,
आधुनिकता की होड़ में
कहीं खो दिए अपने ही पर्व,
और ईमारतों की ऊँचाइयों ने
हमसे दूर कर दिए हमारे सारे शौक।
संस्कारों और संस्कृति की यह धरोहर
जो सम्भाल सकते थे
उन्होंने अपनी राह बदल ली
और जो असमर्थ थे
आज उन्हीं के हाथों में
सब कुछ अब भी सलामत है।
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







