महल खड़े हों सामने, मन में हो अँधियार।
उस घर से तो धन्य है, प्रेम भरा परिवार॥
ईंट-ईंट से घर बने, प्रेम बनाए धाम।
जिस आँगन में हँसी बसे, सुंदर उसका नाम॥
थोड़ी रोटी बाँटकर, खा लें चारों साथ।
ऐसे घर की एकता, सबसे बड़ी सौगात॥
धन-दौलत के ढेर से, मन न मिले तो हार।
टूटी खाट सुख दे जहाँ, वही सच्चा संसार॥
बूढ़ी आँखों में हँसी, बच्चों के अधरों गान।
जिस घर में अखिल हो, धन्य वही इंसान॥
रूठे मन को थाम ले, पोंछे नयनों नीर।
ऐसे घर की देहरी, तीर्थ बने गंभीर॥
घर छोटा हो, क्या हुआ, दिल में हो विस्तार।
जिसमें सबके दुःख बसें, वही बड़ा परिवार॥
अपनों की गलती कर क्षमा, रख लेना विश्वास।
प्रेम बचा रह जाए यदि, फिर क्या जीवन त्रास॥
न सोना, न चाँदी बड़ी, न ऊँचे दरवाज।
माँ की ममता जिस घर में, वही घर है ताज॥
अखिल धन उसको कहें, जो बाँटे मुस्कान।
जिस घर प्रेम नित दीप हो, धन्य वही इंसान॥
घर कितना विस्तृत है, नहीं पूछे जग संसार।
पूछो कितना प्रेम है, कितना सुखी परिवार॥


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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