जब होता है प्यार तो दुनिया बहार लगती है,
जब चढ़ता है पारा प्यार का तो बुखार लगती है,
और वो छुप–छुप के मिलने का किस्सा तो मजेदार लगती है,
कुछ भी कहो ये प्यार थोड़ा नादान, थोड़ा मासूम और थोड़ा समझदार लगती है।
----कमलकांत घिरी

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
जब होता है प्यार तो दुनिया बहार लगती है,
जब चढ़ता है पारा प्यार का तो बुखार लगती है,
और वो छुप–छुप के मिलने का किस्सा तो मजेदार लगती है,
कुछ भी कहो ये प्यार थोड़ा नादान, थोड़ा मासूम और थोड़ा समझदार लगती है।
----कमलकांत घिरी
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