एक ज़माना था हम दस्तक सुनकर घबराते।
दरवाजे की आड़ लेकर दरवाजा खोल आते।।
दिल की धड़कन पर काबू करते किसी तरह।
जो कुछ सुनते उसके एवज में कुछ कह पाते।।
शिष्टाचार निभाना बचपन से ही सीखा हमने।
घूंघट को लिये-लिये ही गुड़ और पानी दे आते।।
मेहमान-नवाजी करने को आतुर रहते 'उपदेश'।
दरवाजे पर कोई भी आये अपना मान समझते।।
मेरा घर सड़क से दूर पगडण्डी चलकर मिलता।
अतिथि के स्वरुप में हम ईश्वर का दर्शन पाते।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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