ग्रीष्म की जलती धूप,
बढ़ती जुल्मी उमस,
जंगल में बिछी हुई
सूखी सूखी पत्तों की
विशाल - विस्तृत कालीन,
देखकर,मन, फिर से,
डरने लग जाता है, कि
कोई चिनगारी,इन पत्तों को
न छू ले,
न फैल जाए,लाल लाल लपटें
पूरे वन क्षेत्र में,
कहीं, मुस्कराती हुई
नवकिसलय,क्रूर अग्नि -लपटों का
शिकार न हो जाए,
बीते पावस में जन्मे
नव-शिशु-पौधे
काली राख बनकर
मृदालिंगन कर
पुनः धरती में न समा जाएं,
वृक्ष - खोखर से निकलती
पंछी शिशुओं की
चूं चूं चूं चूं चूं को
दावानल निगल न लें,
हिरनों की चौकड़ियां
कहीं,भूनी हुई
अस्थियों में बदल जाएं,
सागौन,साल,सीसम
महुआ,बीजा,कोसम
विशाल वृक्षों की
दीर्घकालिक जिम्मेदारियां
विफल न हो जाएं
दावानल का दहशत
मन में घर कर जाती है।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







