कहा था आपने, बात बात में कई बार।
अस्तबल में हमारे, गधे भरे है बेशुमार।
और फिर फितरत, आपकी है शानदार।
डराए चुराए जाते, गधे वहां से बार बार।
आपकी धुलाई का, करिश्मा लाजवाब।
एक-एक गधा रंगते, भगवा करे तैयार।
सवारी के लायक, गधे होते जब तैयार।
घोड़ों की जमात में, लगाते हो दरबार।
एआई जब से छाई, आई खुले बाजार।
चढ़ जाते गधे पर, रकाब में फंसी टांग।
घुड़सवारी का देख, ये अनोखा अंदाज।
अंगुली दांतो तले, करते जय जयकार।
गली-कूचों के रहे, मामूली कल तलक।
तुम बताए जाते, उन्हें दरबार में खास।
मालूम नही जिन्हें,मतलब के अल्फ़ाज़।
आज वे पढ़ाने चले, मुल्क को संस्कार।
इस दौर का तमाशा, बना हुआ मशहूर।
ताज पहनके गधे, कहलाए जाते हुज़ूर।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







