मन के आंगन में
आज भी वो रहती है
वो कोई और नहीं
मेरी बचपन की एक सहेली है
मासूम चेहरा था उसका
कलियों सी मुस्कान
रोते हुए को भी हंसाना
यही थी उसकी पहचान
बिना बताए वो
चेहरे को पढ़ लेती थी
चुटकी में उदासी भगा
खुशियों से भर देती थी
चंचल सी सुंदर सलोनी
खूबसूरत हंसमुख
सबको आदर सम्मान
देने वाली बहुत सुशील सुंदर
अद्वितीय मेरी सहेली थी
उसकी बातें उसकी शरारतें
आज भी मन के
कोने-कोने में बसे हैं
आज वो मुझसे दूर है
पर दिल में मेरे रहती है
यूं तो बहुत सहेलियां थीं
पर उसकी बातें कुछ और थीं
विचार व्यवहार संस्कार उत्तम
देखने में विनम्रता
शालीनता की मूरत थी
कोई अपना रख न सके
उतना ख्याल वो रखती थी
कहने के लिए वो सहेली थी
पर अपनों से भी ज्यादा सगी थी
बहुत प्यारी बहुत न्यारी
मेरी बचपन की वो सहेली थी।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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