Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।


Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।

Newसभी पाठकों एवं रचनाकारों से विनम्र निवेदन है कि बागी बानी यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करते हुए
उनके बेबाक एवं शानदार गानों को अवश्य सुनें - आपको पसंद आएं तो लाइक,शेयर एवं कमेंट करें Channel Link यहाँ है

The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

जां ऐसे कहां निकलती है

जां ऐसे कहां निकलती है

तन खाक भले ही हो जाए जां ऐसे कहां निकलती है

तन मिट्टी में मिल जाए, रूह ऐसे कहां निकलती है

लम्बी है फेहरिस्त कत्ल की सदियों से होते आए हैं

कुछ ऐसे कत्ल भी है जिनमें चीखें कहां निकलती हैं

मिले नहीं सबूत गवाह, कातिल को सजा मिलेगी कैसे

मिली नहीं सजा कातिल को दिल से आह निकलती है

लाएं कहां से न्याय की छलनी जिसमें न्याय मिले सबको

हम कैसे यकीन करें जब, वही छलनी टूटी निकलती है

किसलिए बेकरार हों हम जब तुम न आए हमें मिलने

जब मिलना ही न हुआ तो, ये सांसें कहां मिलती हैं

आईने को बन ठन के देखने से कहां करार मिलता है  

किसी आईने को देखने से, कौरें अब कहां चटखती है

इश्क में जिद करने का कोई फायदा नहीं है यादव

खाक हो जाए ये जिस्म मगर ये जां कहां निकलती है


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (4)

+

सुप्रिया साहू said

वाह वाह वाह.....इश्क़ में कोई जिद नहीं कर सकता इश्क़ ज़िद करने के लिए नहीं बल्कि उसकी खूबसूरती को जीने और बेपनाह प्यार करने के लिए है, बहुत खूबसूरत रचना सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद आपको सादर नमस्कार

रीना कुमारी प्रजापत said

वाह वाह वाह...क्या बात है बहुत बढ़िया

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं सादर नमस्कार

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

कुछ ऐसे क़त्ल भी हैं जिनमें चीखें कहां निकलती हैं।अपराधीकरण और गिरती मानवीय मूल्यों से आहत एक सरल हृदय कवि के मन से निकली वो आवाज़ जो परिवर्तन की चाह से भरी हुई है। सादर प्रणाम भैया जी।

Lekhram Yadav replied

आपकी पारखी नजरों से की गई टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद आपको सादर नमस्कार।

कृष्णा शर्मा said

सच ही कहा आपने जान ऐसे कहाँ निकलती हैं 👏👏👏
बहुत ही खूबसूरत रचना 👏👏
एक एक लफ़्ज़ बहुत ही खूबसूरत हैं 👏👏
सादर प्रणाम 🙏😊

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं सादर नमस्कार

कविताएं - शायरी - ग़ज़ल श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन