जां ऐसे कहां निकलती है
तन खाक भले ही हो जाए जां ऐसे कहां निकलती है
तन मिट्टी में मिल जाए, रूह ऐसे कहां निकलती है
लम्बी है फेहरिस्त कत्ल की सदियों से होते आए हैं
कुछ ऐसे कत्ल भी है जिनमें चीखें कहां निकलती हैं
मिले नहीं सबूत गवाह, कातिल को सजा मिलेगी कैसे
मिली नहीं सजा कातिल को दिल से आह निकलती है
लाएं कहां से न्याय की छलनी जिसमें न्याय मिले सबको
हम कैसे यकीन करें जब, वही छलनी टूटी निकलती है
किसलिए बेकरार हों हम जब तुम न आए हमें मिलने
जब मिलना ही न हुआ तो, ये सांसें कहां मिलती हैं
आईने को बन ठन के देखने से कहां करार मिलता है
किसी आईने को देखने से, कौरें अब कहां चटखती है
इश्क में जिद करने का कोई फायदा नहीं है यादव
खाक हो जाए ये जिस्म मगर ये जां कहां निकलती है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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