चेतन मन में आश्रय देकर
मुख की आभा जगा रहे हो,
कसक रही थी वेदना स्वर
तिलक मस्तक लगा रहे हो।
मातृत्व रूप वात्सल्य लिए
सत्य स्वरूप निरख रही है,
जीवन रूपी उज्जवलता का
पाकर प्रवेश परख रही है।
तन वैभव से परिपूरीत कर
सच दुनियां की दिखा रहे हो,
संचित श्वेत दुग्ध रस पान से
सुन्दर रचना तुम सजा रहे हो।
आत्म चिंतन स्वाभिमान से
सृजित शक्ति मैं लगा रही हूं,
हे शुभे! सर्वस्व ममत्व लिए
नवांकुर को नित नहा रही हूं।
मलिन मन को त्रान देकर
मानव मन को भुला रहे हो,
मां की ममता निर्मल होती
सुन्दर तन से मिला रहे हो।
_ देवनन्दन कुमार, बरहथिया।
21/07/2026.


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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