कल भी गुज़र गयी
यूँ हीं हँसी शाम
मगर आया नहीं
प्यार में वो मक़ाम
जिसमें वादे
लिए दिए जाते हैं
कसमेे-वसमे
खाई जाती है
आज भी क़रीब था
दिवस का अवसान
हम दोनों एक दूसरे को
सिर्फ़ देखते रहे
शायद दोनों
अपनी-अपनी
अना की गिरफ़्त में
बंधे रहे

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
कल भी गुज़र गयी
यूँ हीं हँसी शाम
मगर आया नहीं
प्यार में वो मक़ाम
जिसमें वादे
लिए दिए जाते हैं
कसमेे-वसमे
खाई जाती है
आज भी क़रीब था
दिवस का अवसान
हम दोनों एक दूसरे को
सिर्फ़ देखते रहे
शायद दोनों
अपनी-अपनी
अना की गिरफ़्त में
बंधे रहे
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