"इस संसार में 'माया' या 'भ्रम' जैसा कुछ भी नहीं है;
जो कुछ भी दिखाई, सुनाई या महसूस हो रहा है,
वह पूरी तरह से ठोस हकीकत (Absolute Reality) है। हम इस हकीकत से अलग कोई बाहरी तत्व नहीं हैं,
बल्कि हम स्वयं हकीकत के भीतर समाए हुए हैं और बाहर भी वही अखंड हकीकत व्याप्त है।
इस ब्रह्मांड का परम नियम यह है कि 'जो पहले से है, केवल वही घटित होता है।'
जैसे घुटने में जोड़ (Joint) पहले से 'है', तभी पैर का मुड़ना 'होता है'।
जिसे मनुष्य अपनी 'चुनने की आज़ादी' (Freedom or Free Will) समझता है,
वह केवल एक मानसिक भ्रम है;
क्योंकि वास्तव में वह 'नियतिवाद' (Determinism) स्वयं ही हमारे माध्यम से अपना चुनाव कर रहा है।
यदि वह मूल हकीकत अस्तित्व में 'नहीं होती',
तो संसार में किसी भी कार्य को करने का कोई 'कारण' (Causality) ही पैदा नहीं होता।
अतः, करने वाला (Doer) कोई व्यक्ति नहीं है,
केवल हकीकत का महा-प्रवाह ही है जो स्वयं को प्रकट कर रहा है।"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







