जो, तुम कभी थे ही नहीं,आज कैसे हो गए!
खिलते कमल से थे,आज कांटों जैसे हो गये!
बेरूखी, ये ज़माने की थी या खता हमारी थी
चांद गगन से, फूल चमन से, दूर वैसे हो गये!
गिले - शिकवे हमसे, कभी कुछ कहा क्यूं नहीं,
हमें समझ नहीं आता,नजारे कैसे -कैसे हो गये!
जब भी देखा तुम्हें,मुस्कराते हुए देखा, हमने
बेहद अनमने,अनबने, कुछ अनकहे से हो गये!
अब बता भी दो, जरा,हमसे भूल क्या हो गई,
पास -पास रहकर भी,इतने दूर हमसे हो गये!
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







