(बाल कविता)
तेल रसोई की है शान
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तेल रसोई की है शान ।
बनते भांति-भांति पकवान ।
छौंका जाता मटर पनीर
खुशबू करती हमें अधीर
बनता बढ़िया मस्त पुलाव
खाते सब ले ले कर चाव
थोड़ा-सा बस डालो तेल
सब्जी में आ जाती जान ।
तेल रसोई की है शान ।।
गरम भठूरे भाते खूब
छोले के संग खाते खूब
गरम पराठे बढ़िया स्वाद
खा कर करते हैं सब याद
बैंगन भर्ता बने कमाल
लप-लप करती देख जुबान ।
तेल रसोई की है शान ।।
सरसों का बनता जब साग
सोई भूख भी जाए जाग
कद्दू की सब्जी के साथ
पूड़ी लग जाए यदि हाथ
खा लेते सब भर भर पेट
बच्चे बूढ़े और जवान ।
तेल रसोई की है शान ।।
भरवा भिंडी और अचार
खाता है पूरा परिवार
गरम समोसा काला जाम
भाता सबको आठों याम
गरम जलेबी रस की धार
खाता पूरा हिंदुस्तान।
तेल रसोई की है शान ।।
पुआ पकौड़ी खाता चाँद
बार बार करता फ़रियाद
टिक्की मटर बतासा चाट
फास्ट फूड में इनका ठाट
तेल सभी पर करता राज
लेकिन करता नहीं गुमान।
तेल रसोई की है शान ।।
गरम इमरती भाती खूब
अपना रंग जमाती खूब
लिट्टी चोखा और कबाब
खाने वाले बड़े नवाब
किन्तु शुद्ध ही खाएं तेल
(बाल कविता)
तेल रसोई की है शान
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तेल रसोई की है शान ।
बनते भांति-भांति पकवान ।
छौंका जाता मटर पनीर
खुशबू करती हमें अधीर
बनता बढ़िया मस्त पुलाव
खाते सब ले ले कर चाव
थोड़ा-सा बस डालो तेल
सब्जी में आ जाती जान ।
तेल रसोई की है शान ।।
गरम भठूरे भाते खूब
छोले के संग खाते खूब
गरम पराठे बढ़िया स्वाद
खा कर करते हैं सब याद
बैंगन भर्ता बने कमाल
लप-लप करती देख जुबान ।
तेल रसोई की है शान ।।
सरसों का बनता जब साग
सोई भूख भी जाए जाग
कद्दू की सब्जी के साथ
पूड़ी लग जाए यदि हाथ
खा लेते सब भर भर पेट
बच्चे बूढ़े और जवान ।
तेल रसोई की है शान ।।
भरवा भिंडी और अचार
खाता है पूरा परिवार
गरम समोसा काला जाम
भाता सबको आठों याम
गरम जलेबी रस की धार
खाता पूरा हिंदुस्तान।
तेल रसोई की है शान ।।
पुआ पकौड़ी खाता चाँद
बार बार करता फ़रियाद
टिक्की मटर बतासा चाट
फास्ट फूड में इनका ठाट
तेल सभी पर करता राज
लेकिन करता नहीं गुमान।
तेल रसोई की है शान ।।
गरम इमरती भाती खूब
अपना रंग जमाती खूब
लिट्टी चोखा और कबाब
खाने वाले बड़े नवाब
किन्तु शुद्ध ही खाएं तेल
तभी बनेगा तन बलवान ।
तेल रसोई की है शान ।।
बूँदी इसमें लेते छान
लड्डू मीठे की पहचान
सारी चीज बनाता तेल
सबका स्वाद बढ़ाता तेल
किन्तु अधिक न करें प्रयोग
लेंगे घेर रोग अनजान ।
तेल रसोई की है शान ।।
~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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