” नन्हे परिंदे जमीं छोड़ उड़ने को आतुर रहे..
जब उड़ने लगे तो , जमीं भूल गये ..
ज़रा चोट लगी परो को, तो जमीं खोजने लगे..
जमीं मिली तो , पैर अब टिक ना पाए..
सुनो परिंदों !
आसमां की तलाश में जमीं को ना भुलाएं.."
✍🏻 अनुकूल शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







