(बाल कविता)
सोने का मटका
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एक रात दो चोर पधारे ।
इधर-उधर चहुँओर निहारें।।
धीरे-धीरे कदम बढ़ाया ।
हाथ नहीं पर कुछ भी आया ।।
लगा अचानक उनको झटका ।
मिला एक सोने का मटका ।।
लेकिन मटका बहुत बड़ा था ।
दो लोगों से नहीं उठा था ।।
चोरों ने फ़िर फोन लगाया ।
दस लोगों को और बुलाया ।।
मटका फिर भी उठा न पाए ।
एक इंच भी हिला न पाए ।।
ज़ोर लगाया सबने जम कर ।
गिरे मुँह भरा वहीं फर्श पर ।।
चोट लगी तो सब चिल्लाए ।
एक-दूसरे पर झल्लाए ।।
सुना शोर तो घर भर जागे ।
बारह चोर निकल कर भागे ।।
लेकिन सबने उनको घेरा ।
और छँट गया घना अँधेरा ।।
चोरों को फिर मारा मिलकर ।
थाने ले गए पकड़-पकड़ कर ।।
थाने पर भी हुई पिटाई ।
और जेल की हवा खिलाई ।।
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~राम नरेश "उज्ज्वल"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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