(बाल कविता)
बिना नमक के मजा न आए
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खारा खारा लगे नमक ।
प्यारा प्यारा लगे नमक ।।
चुटकी भर केवल पड़ जाए
स्वाद अचानक से बढ़ जाए
सब्जी और दाल में डालो
रोटी पूड़ी के संग खा लो ।
फीका खाना कभी न भाए
बिना नमक के मजा न आए
सबके मन को भाने वाला
राजदुलारा लगे नमक।
खारा खारा लगे नमक ।।
चाट मसाले में पड़ जाए
बहुत चटपटा मन को भाए
चटनी और अचार बना लो
नमक लगा कर खीरा खा लो
नींबू पानी में घुल जाए
गर्मी से राहत पहुँचाए
जलजीरा या पना बने तो
अमृत धारा लगे नमक ।
खारा खारा लगे नमक ।।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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