Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।


Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।

Newसभी पाठकों एवं रचनाकारों से विनम्र निवेदन है कि बागी बानी यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करते हुए
उनके बेबाक एवं शानदार गानों को अवश्य सुनें - आपको पसंद आएं तो लाइक,शेयर एवं कमेंट करें Channel Link यहाँ है

The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

मिट्टी है अनमोल

उजाला

पर्यावरण विशेषांक

जून, 2019

मिट्टी है अनमोल

राम नरेश 'उज्ज्वल'

मिट्टी को लोग बेकार समझते हैं। उससे दूर भागते हैं। गंदा कहते हैं। परन्तु मिट्टी बेकार नहीं है। इसी से फसलें उगती हैं। ईंटें बनती हैं। इसके भीतर क्षार, रत्न, विटामिन्स, रसायन, खनिज धातु एवं रस पाए जाते हैं। औषधियों का भण्डार है। सारे औषधीय पौधे जमते हैं इसी पर। सोचो अगर मिट्टी न होती तो क्या होता। लोग क्या खाते, क्या पीते?

मिट्टी वरदान है। इसके भीतर हजारों रोगों को भगाने के गुण हैं। महात्मा गाँधी जी भी मिट्टी का इस्तेमाल करते थे रोगों को भगाने में। इसके अन्दर है रोग निरोधक क्षमता। मिट्टी की धूल में कई लाभदायक बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो बच्चों को बीमारियों से बचाते हैं। जिन बच्चों को धूल-मिट्टी से दूर रखा जाता है, वे बड़े होने पर एलर्जी एवं अस्थमा जैसे रोगों के शिकार हो जाते हैं।

नंगे पैर मिट्टी पर टहलने से शरीर में चुस्ती-फुर्ती आ जाती है। गीली या सूखी मिट्टी पर पैदल चलने से उसकी ऊर्जा शरीर को प्राप्त होती है। मिट्टी के बने बर्तनों में पकाया भोजन अत्यन्त स्वादिष्ट एवं लाभदायक होता है। इन बर्तनों में रखा भोजन जल्दी खराब नहीं होता। जबकि लोहे, ताँबे, पीतल आदि में रखी चीजें जल्दी खराब हो जाती हैं।

मिट्टी के कई रंग और रूप हैं। जैसे काली मिट्टी, पीली मिट्टी, सफेद मिट्टी, मुल्तानी मिट्टी, बलुई मिट्टी आदि। किन्तु उपयोगिता की दृष्टि से काली मिट्टी का प्रथम स्थान है। उसके बाद पीली, सफेद एवं लाल मिट्टी का स्थान है।


प्राकृतिक चिकित्सा में मिट्टी एक प्रमुख औषधि है। औषधि के लिए जब भी मिट्टी का उपयोग करें तो साफ-सुथरी मिट्टी का ही प्रयोग करें। उसमें कंकड़, पत्थर न हों। नदी की मिट्टी बहुत लाभदायक होती है।

प्रयोग करने के पहले मिट्टी को खोदकर कुछ दिनों के लिए वहीं छोड़ दें। ताकि उसमें खुली हवा, धूप एवं चाँदनी के गुण अच्छी तरह प्रवेश कर जाएँ। प्रयोग के पहले उसे कूटकर मोटे कपड़े से छान लें, ताकि कंकड़-पत्थर आदि निकल जाएँ।

छनी हुई मिट्टी को ठंडे जल से धुले और उसे कपड़े पर लेप कर पट्टी तैयार करें। लेप तैयार करते समय साफ जगह का चुनाव करें। लेप बनाने के लिए मिट्टी से आधा जल मिलाएँ। साफ कपड़े पर मिट्टी की परत की मोटाई आधा इंच होनी चाहिए। रोगों के उपचार के लिए मिट्टी की पट्टी तथा अन्य प्रयोग इस प्रकार हैं:-

- मासिक धर्म के समय पेट पर मिट्टी की पट्टी को बाँधने से दर्द दूर हो जाता है। इसका प्रयोग करते समय पेट खाली होना चाहिए। गर्भाशय सम्बन्धी सभी रोगों के लिए यह पट्टी उपयोगी है, किन्तु गर्भवती महिलाएँ इसका प्रयोग न करें।

- तेज बुखार में रोगी की बेचैनी दूर करने के लिए गीली पट्टी को पेट पर बाँधना चाहिए। पट्टी जल्दी-जल्दी बदलना चाहिए। मलेरिया बुखार में ठंडी पट्टी का इस्तेमाल करें।

- गर्म पट्टी का लेप पानी उबाल कर तैयार करें। गर्म पट्टी आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत में चिपके मल को बाहर निकालती है। पेचिस, मरोड़, ऐंठन एवं अतिसार आदि में पेड़ू पर गर्म पट्टी बाँधने से लाभ मिलता है।

- काली मिट्टी के लेप से ठंडक मिलती है। मधुमक्खी, खानखजूर, मकड़ी, बरेरें एवं बिच्छू आदि के काटने पर काली मिट्टी का लेप लगाएँ। विष तुरन्त उतर जाएगा।

- सूजन, फोड़ा, फुंसी होने पर मिट्टी की पट्टी बाँधे। फोड़ा बैठ जाएगा या पक कर फूट जाएगा। मवाद निकल जाने पर मिट्टी की पट्टी बाँधते रहें। घाव शीघ्र भर जाएगा।

- यदि बच्चे को मिट्टी खाने की आदत हो तो गेल मिट्टी को घी में तल कर शहद में मिलाएँ। इसे बच्चे को खिलाएँ। इससे बच्चे की आदत में सुधार होगा।

- गीली चन्दन लेप से दिमाग की गर्मी दूर होती है। सिर दर्द एवं चक्कर आदि ठीक होता है। इसमें गीली मिट्टी को चन्दन की तरह सिर पर लगा लेना चाहिए।

- मुँह में छाला होने पर भी छाले में मिट्टी का लेप लगाएँ। आधे घंटे बाद सादे पानी से कुल्ला कर लें। छाले शीघ्र ठीक हो जाएँगे।

- समुद्र व नदी किनारे की बलुई मिट्टी से घंटे भर के लिए मुँह और सिर छोड़कर पूरा शरीर ढक लें। इससे घबराहट, शारीरिक ताप, जलन सब दूर होगा।

- शरीर के सभी प्रकार के दर्दों को दूर करने के लिए आइसमड कीचड़ के गड्ढे में इस प्रकार रोगी को खड़ा करें कि सिर कीचड़ से बाहर रहे। कीचड़ में खड़े होने के लिए रोगी के कपड़े उतार दें। दुबले-पतले व्यक्ति को दस मिनट तथा बलवान व्यक्ति को आधा घंटा कीचड़ में रखें।

- साबुन और शैम्पू की तरह भी मिट्टी का इस्तेमाल कर सकते हैं। साबुन में कास्टिक सोडा होता है, जो त्वचा को नुकसान पहुँचाता है। प्राचीन काल में रेहू मिट्टी से राजा महाराजाओं के भी वस्त्र धुले जाते थे।

- मुल्तानी मिट्टी से सिर धोने से बाल काले, घने, मुलायम व चिकने रहते हैं।

- शरीर पर साफ मिट्टी लगाकर मालिश करें और दस मिनट बाद स्नान करें। उबटन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

- चिकनी मिट्टी सुबह-शाम मसूड़ों पर मलने से हिलते दाँत भी मजबूत हो जाएँगे। दाँत दर्द होने पर तीन बार साफ मिट्टी से मंजन करें। दर्द दूर हो जाएगा। पायरिया होने पर मिट्टी घोलकर कुछ देर मुँह में रखें, फिर कुल्ला करें। लाभ होगा।

- प्लीहा यानि तिल्ली के बढ़ने पर एक महीने तक गीली मिट्टी पेट पर लगाएँ। तिल्ली का बढ़ना बंद हो जाएगा।

- नकसीर की शिकायत होने पर मिट्टी के बर्तन में दस ग्राम मुल्तानी मिट्टी आधा किलो पानी में रात को भिगो दें और सुबह पानी छानकर पी लें। कुछ दिन ऐसा करने से नकसीर ठीक हो जाएगी। नाक पर मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाने से भी नाक से खून आना बंद होता है।

- यदि घुटनों में दर्द हो तो रात को मिट्टी की पट्टी बाँध कर पानी की भाप से सिकाई करें। गठिया ठीक हो जाएगा।

- एक बड़ा चम्मच मुल्तानी मिट्टी लें। तीन बड़े चम्मच दही, एक चम्मच चाय एवं शहद लेकर मिलाएँ। इस लेप को चेहरे पर लगाएँ। यह लेप त्वचा की गहरी सफाई करता है। बंद रोमकूप खुल जाते हैं और त्वचा सुन्दर हो जाती है

- एक बड़े चम्मच में मुल्तानी मिट्टी लें। तीन बड़े चम्मच संतरे का रस लें। दोनों को अच्छी तरह मिलाएँ। इस लेप को चेहरे पर लगाएँ। इससे दाग-धब्बे दूर होंगे और तैलीयपन गायब होगा।

- मुल्तानी मिट्टी को भिगोकर पीसें और उसमें कपूर मिलाएँ। इस लेप को शरीर पर लगाएँ। एक घंटे बाद नहा लें। फुंसियाँ गायब हो जाएँगी।

- चार चम्मच मुल्तानी मिट्टी लें, दो चम्मच शहद, दो चम्मच दही एवं एक चम्मच नींबू का रस लें। इन सबको मिलाएँ और चेहरे पर लगाएँ। आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से धो दें। फिर बर्फ का एक टुकड़ा लेकर चेहरे पर रगड़ें। ऐसा करने से चेहरे का रंग निखरने लगेगा।

- यदि बच्चे की नाभि में सूजन हो तो मिट्टी के एक ढेले को आग में गर्म करें। उस ढेले को दूध में बुझा लें, फिर उससे नाभि की गर्म सिकाई करें। बच्चे की नाभि की सूजन ठीक हो जाएगी। इसी तरह पीली मिट्टी को आग में गर्म करके ठण्डा करें और उसे दूध में घिस कर लेप तैयार करें। इसे बच्चे की नाभि पर लगाएँ। नाभि का दर्द ठीक हो जाएगा।

मिट्टी की उपयोगिता के जितने गुणगान किए जाएँ, वे कम हैं। फिर भी पता नहीं लोग मिट्टी से दूर क्यों भागते हैं। पूरे घर में कहीं भी कच्चा स्थान क्यों नहीं छोड़ते। यदि कच्चे स्थान पर थोड़ी देर चलेंगे तो मिट्टी की ऊर्जा ही प्राप्त करेंगे। सिर्फ कंक्रीट से क्या मिलेगा। पक्के घर में भी कुछ तो मिट्टी रखें। कुछ तो आदर दें इस अनमोल मिट्टी को। मिट्टी का तिरस्कार न करें।

हमारा शरीर जिन पाँच तत्वों से मिलकर बना है, मिट्टी उनमें से एक प्रमुख तत्व है। यह नाता अटूट है। अतः मिट्टी से दूर रहकर रोगों को निमंत्रण न दें। किसी न किसी रूप में मिट्टी के सम्पर्क में रहें। मिट्टी का संरक्षण करें। समस्त पर्यावरण का आधार है मिट्टी। मिट्टी के बिना कुछ भी सम्भव नहीं है, न पेड़-पौधे, न जीव-जन्तु न मानव जीवन। अतः मिट्टी को सहेजें, उसका संरक्षण करें और प्रदूषण से मुक्त रखें। इसी में हमारा कल्याण है।

मुंशी खेड़ा, ट्रांसपोर्ट नगर,

*लखनऊ




समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (1)

+

वन्दना सूद said

अद्भुत लेखन 👌👌

काल्पनिक रचनायें श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन