(बाल कविता)
नन्हीं चींटी
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नन्हीं चींटी चलती जाए ।
नहीं परिश्रम से घबराए ।।
मिल जुल कर रहना सिखलाए,
मुश्किल से लड़ना सिखलाए,
उठ कर गिरना गिर कर उठना,
पर्वत पर चढ़ना सिखलाए ।
नहीं परिश्रम से घबराए ।।
धीरे धीरे चलने वाली,
नहीं किसी से डरने वाली,
हिम्मत और धैर्य के बल पर,
खुद से भारी बोझ उठाए।
नहीं परिश्रम से घबराए ।।
बीन बीन कर दाने लाए,
घर में अपने ढेर लगाए,
मेघ बरसते जब धरती पर,
बैठे-बैठे तब वह खाए।
नहीं परिश्रम से घबराए ।।
बुरे वक्त के लिए बचाए,
थोड़ा रखकर, थोड़ा खाए,
कभी रुके ना, कभी थके ये,
हरदम आगे कदम बढ़ाए ।
नहीं परिश्रम से घबराए ।।
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~ राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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