(बाल कविता)
मोटी बिल्ली
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मोटी बिल्ली बहुत बड़ी ।
रोटी खाती पड़ी - पड़ी ।।
कहती मेरी भूख मिटाओ ,
चूहे भैया जल्दी आओ ,
बीमारी ने मुझको घेरा ,
डाल दिया तन मन में डेरा ,
साँस रुक रही घड़ी घड़ी ।
मोटी बिल्ली बहुत बड़ी ।।
आँखों में भी घोर अँधेरा ,
उठता नहीं हाथ भी मेरा ,
अंत समय में दवा पिला दो ,
दर्द बहुत है, पैर दबा दो ,
मौत सामने आन खड़ी ।
मोटी बिल्ली बहुत बड़ी ।।
मौसी झूठ नहीं तुम बोलो,
सच्चाई से मुँह मत मोड़,
तुमने दिया हमेशा धोखा,
मैं ना दूँगा अबकी मौका,
कसके मारी एक छड़ी ।
मोटी बिल्ली बहुत बड़ी ।।
बिल्ली मौसी फिर गुर्राई ,
मजा चखाने उठ कर आई ,
घुसा भाग कर चूहा बिल में ,
हसरत रह गई केवल दिल में ,
ताक रही अब खड़ी खड़ी ।
मोटी बिल्ली बहुत बड़ी ।।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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