हे जगजननी, माँ गढ़देवी
तेरी शान निराली है!
तू ही शारदा, तू ही भवानी,
तू ही खप्परवाली है!
सबसे प्यारा माँ तेरा द्वारा,
गढ़वा क्या जाने जग सारा,
गढ़ की देवी अष्टभुजी माँ,
जगदम्बा तुम, तुम ही तारा!
हर पल निजभक्तों की दाती
करती तुम रखवाली है!
हे जगजननी, माँ गढ़देवी………
तेरी शरण है जो भी आता,
धन्य उसका जीवन हो जाता,
दीन-दुखी या योगी-भोगी,
तू ही सबकी जीवनदाता!
फल इच्छित देकर तू मईया
करती दूर तंगहाली है!
हे जगजननी, माँ गढ़देवी………
भगवती तेरे मंदिर आऊँ,
चरणों में नित शीश झुकाऊँ,
माँ मेरी मैं तुझको ध्याकर,
जग के सारे सुख पा जाऊँ!
तेरी कृपा से मनती मेरी
तीज-त्योहार, दीवाली है!
हे जगजननी, माँ गढ़देवी………
हारे का तुम एक सहारा,
सारी सृष्टि दास तुम्हारा,
धर्म ध्वजा तेरा लहराए,
चहुँदिश गूंजे जय-जयकारा।
जग में तेरा डंका बजता
चारो तरफ खुशहाली है।
हे जगजननी, माँ गढ़देवी………
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©️✍🏻प्रमोद कुमार,
गढ़वा (झारखण्ड)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
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