"मैं वो शाम हूँ"
मैं वो शाम हूँ जो ढले तो रात हो जाए,
तेरे लबों पर आऊँ तो बात हो जाए।
मैं वो ख्वाब हूँ जो आँखों में ठहरा रहा,
तू पलक झपके और मैं ज़ज्बात हो जाए।
मैं वो लम्हा हूँ जो तेरे साथ गुज़रा,
याद आए तो आँखों में बरसात हो जाए।
मैं वो साया हूँ जो साथ चलता है तेरा,
तू मुड़े तो मुझसे मुलाक़ात हो जाए।
मैं वो चाँद हूँ जो तेरी छत पर उतरे,
तू देख ले तो हर रात चाँदनी रात हो जाए।
मैं वो कागज़ हूँ कोरा तेरी किस्मत का,
तू लिख दे तो मेरी हर स्याह बात हो जाए।
मैं वो लफ़्ज़ हूँ जो तेरे होंठों पर रुका,
तू कह दे तो पूरी कायनात हो जाए।
मैं वो साँस हूँ जो तेरे सीने में बसी,
तू ले ले तो मेरी हयात हो जाए।
मैं वो नग़मा हूँ जो तेरे दिल में बजा,
तू सुन ले तो सारा जहाँ साथ हो जाए।
मैं वो आईना हूँ जिसमें तू ही तू बसे,
तू देखे तो खुद से भी पहचान हो जाए।
भूलना चाहे तो भूल ना पाए मुझे,
मैं तेरी आदत, तेरी हर बात हो जाए।
मर भी जाऊँ तो मिट ना पाए मेरा नाम,
मैं तेरी धड़कन का आग़ाज़ हो जाए।
रचनाकार - पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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