(बाल कविता)
सौ रोगों की एक दवा
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साफ़-सफ़ाई शुद्ध हवा ।
सौ रोगों की एक दवा ।।
कचरा कहीं न फैलाओ ।
झाड़ू से घर चमकाओ ।।
गंदा होता जहाँ-जहाँ ।
मक्खी-मच्छर वहाँ-वहाँ ।।
सही बात पर डटे रहो ।
बीमारी से बचे रहो ।।
थैला लेकर ही निकलो ।
हर सामान उसी में लो ।।
परेशान मत हो, जागो ।
पन्नी को मन से त्यागो ।।
शौच खुले में मत जाओ ।
शौचालय को अपनाओ ।।
सिर्फ दिखावा करो नहीं ।
जीवन में दुख भरो नहीं ।।
रहन-सहन शैली बदलो ।
गंदी आदत भी बदलो ।।
सदा स्वच्छता अपनाओ ।
खुशियाँ ही खुशियाँ पाओ ।।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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