कविता दुनिया मतलबी है।
दिनांक 04/05/2026
ये दुनिया मतलबी है ये अब हम मान लेते है।
लेकिन गम भुलाने के लिए सबको साथ लेते है।
कौन अपना कौन पराया ये जान लेते है।
हंसने हंसाने के लिए सबसे काम लेते है।
अपनी किस्मत को अब हम नहीं दोष देते है।
जैसी जिंदगी मिली हमको वैसी जी लेते है।
रहो खुश हमेशा थोड़ा मुस्करा लेते है।
गम ज्यादा होने पर थोड़ा बांट लेते है।
सब अपने है सब पराए ये हम जान लेते है।
फिर भी जिंदगी को हम रंगीन बना लेते है।
राह में फूल मिले तो थोड़ा गुनगुना लेते है।
मिले अपने हमे तो थोड़ा मुस्करा लेते है।
ये दुनिया मतलबी है ये जान लेते है।
लेकिन गम भुलाने के लिए सबको साथ लेते हैं।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान 💞💞✒️💞💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







