ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत साल रहा ये हमारा,
और सबसे दर्दनाक साल भी यही साबित हुआ।
एक पल वो खुशी दी इसने
जिसका अंदाज़ा भी नहीं लगाया था हमने,
वही दूसरे ही पल उसी खुशी को बड़े ही बेदर्दी से रौंदा इसने।
सही मायने में ज़िंदगी को बनाया भी इसी साल ने,
और बनाकर फिर उजाड़ा भी इसी साल ने।
अब क्या बताएं? कैसे बताएं?
कि क्या-क्या किया इस साल ने।
कुछ अपनों का ज़मीं में धंसा हुआ घिनौना रूप दिखाया,
वहीं कुछ अजनबियों को हमारे बिल्कुल पास ले आया।
वो खुशी भी मिली इस साल जिसकी कभी ख़्वाहिश ना की थी हमने,
और वो दर्द भी मिला इसी साल जिससे तसव्वुर में भी डरते थे।
✍️ रीना कुमारी प्रजापत ✍️
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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