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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

अभाव सा क्यूं है

अभाव सा क्यूं है

प्रिय लिखनतु

अब आपकी गति में, ये ठहराव सा क्यूं है

तेरी बज्म में शायरों का अभाव सा क्यूं है

वो, हंसी वो ठहाके, वो रौनक महफिल की

गायब है ये सब दिल में तनाव सा क्यूं है

चले गए हैं कुछ लोग आपकी महफिल से

तुम्हारी इस दुनियां में ये बहाव सा क्यूं है

कोई तो वजह होगी हालात बदल जाने की

कुछ अनचाहे लोगों का जमाव सा क्यूं है

कुछ बातें छूट गई जिन में नई रवानी थी

तन्हाई ओ खामोशी का ठहराव सा क्यूं है

कुछ तो कमी रही होगी तुम्हारी कोशिश में

नजर आता नहीं नया, बदलाव सा क्यूं है

कुछ करो नया और कुछ सोच के देख लो

चलो उठो जागो सोच में ये अभाव सा क्यूं है


यह रचना, रचनाकार के
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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (5)

+

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

महफ़िल में सचमुच पहले जैसा रौनक नहीं है। हंसी,मजाक, प्रेम, लालित्य यही सब तो महफ़िल को खुशनुमा बनाते हैं। सादर प्रणाम करता हूं 🙏🙏🙏

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद सर,आपको सादर नमस्कार।

रीना कुमारी प्रजापत said

👌👍nice 🙏

Lekhram Yadav replied

इस सांकेतिक प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं आभार

शिवचरण दास said

मुहब्बत के नाम पर मजहबी नफरत उड़ा रहे हैं
शायरी के बजाय अपनी ही हसरत सजा रहे हैं
सुलगा रहे हैं भाईचारे के हसीन गुलशन में आग
लिखन्तु के नाम पर भी खुलकर बट्टा लगा रहे हैं.

Lekhram Yadav replied

न तो हमने मजहबी नफ़रत फैलाई

ना ही हमने भाई चारे में आग लगाई

ना ही लिखनतु के नाम पर बट्टा लगाया

और ना ही कभी अपनी हसरत सजाई

आपको क्यों लग रहा है कि ऐसा हुआ

क्यूं हमारे ऊपर आपने तोहमद लगाई
क्या हुआ आप जो इतने तिलमिलाए

क्यों आपने अपनी ये भौहें चढाई

पल्लवी श्रीवास्तव said

अति सुन्दर रचना

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद मैम, आपको सादर नमस्कार।

Shiv Charan Dass said

क्षमा क्षमा सादर लेखराम जी हमको क्षमा करना
इन शब्दों का निहितार्थ ये कतई आप हेतु नहीं था
लिखन्तु के सब रचनाकार बड़ा शानदार लिख रहे हैँ और आप तो सत्यम शिवम सुंदरम सृजन कर रहे हैं

कुछ शायर मगर ऐसे भी महफिल में शामिल हैं
मुहब्बत वतनपरस्ती को भी निरर्थक बता रहे हैं

फिर भी खतावार हैं हम जो चाहे सजा दें आप
कुछ लफ्जों की कमी से हमसे हो गया है पाप. .

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