अभाव सा क्यूं है
प्रिय लिखनतु
अब आपकी गति में, ये ठहराव सा क्यूं है
तेरी बज्म में शायरों का अभाव सा क्यूं है
वो, हंसी वो ठहाके, वो रौनक महफिल की
गायब है ये सब दिल में तनाव सा क्यूं है
चले गए हैं कुछ लोग आपकी महफिल से
तुम्हारी इस दुनियां में ये बहाव सा क्यूं है
कोई तो वजह होगी हालात बदल जाने की
कुछ अनचाहे लोगों का जमाव सा क्यूं है
कुछ बातें छूट गई जिन में नई रवानी थी
तन्हाई ओ खामोशी का ठहराव सा क्यूं है
कुछ तो कमी रही होगी तुम्हारी कोशिश में
नजर आता नहीं नया, बदलाव सा क्यूं है
कुछ करो नया और कुछ सोच के देख लो
चलो उठो जागो सोच में ये अभाव सा क्यूं है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







