ये ख्वाहिश मेरे दिल की
तुम से मिलने की अगर मजबूरी ना होती
कसम तुम्हारी कोई दिल से, ये दूरी होती
यूं तो मिलते हो तुम, ख्वाबों में अक्सर
पर चाहत कोई ख्वाबों से पूरी नहीं होती
जागते, रहते रात दिन, हम तुम्हारे लिए
अगर, सोने के लिए, नींदें जरूरी न होती
कोई कीमत नहीं इन सांसों की मेरे लिए
अगर जीने के लिए, सांसे जरूरी न होती
यूं तो ख्वाहिशें हैं अनंत जिन्दगी में मेरी
ये, ख्वाहिश मेरे दिल की, अधूरी न होती
किसी मुमताज को हम भी बना लेते अपना
गर ताजमहल, बनाने की मजबूरी न होती
कभी बन के हकीकत हम से मिल यादव
मिले बगैर कोई ख्वाहिश, पूरी नहीं होती
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







