तुम्हारा जिस तरह साथ मिला सफर में।
उसी तरह न बिछड़ जाए आगे सफर में।।
मुझे क्या खबर थी कि बिखर जाऊँगी मैं।
भूल बस मान लिया था अपना सफर में।।
कदर करना उसको न आया जिन्दगी में।
मैं निभाती ही रही माँ की तरह सफर में।।
दिल को समझाना हुआ मुश्किल मुझमें।
डूबते सूर्य के बाद अँधेरा आया सफर में।।
खुद को मारूं कब तक जान पर आ गई।
कदम भारी 'उपदेश' उठ न पाए सफर में।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







