यादों में ना सही
मैं तुम्हारे साथ ना सही
तेरी परछाइयों में तो हूं
मैं तेरी यादों में ना सही
तेरी तन्हाइयों में तो हूं
क्यूं ढूंढ़ते हो, बार-बार
मुझको तुम बेकरारी में
तेरी हंसीं यादों के संग
मैं अमराइयों में तो हूं
मैं रहता हूं दूर तुम से
मगर दिल से दूर नहीं
मैं तेरी हंसी में नहीं हूं
तेरी रूसवाइयों में तो हूं
कहती है लहर साहिल से
मिल कर यही बार-बार
मौजों की तरह दिल की
इन गहराइयों में तो हूं
धुंध के साए में तुमको
भले ही नजर ना आऊं
मगर इन में छुपी हुई
इन परछाइयों में तो हूं
लङता ही रहा हूं हरदम
हर गम के खिलाफ मैं
जो मिटी नहीं मिट कर
उन सच्चाइयों में तो हूं
दूर रहता है क्यूं तुम से
क्या तुम्हें बताए यादव
साथ रहना है मुझे तेरे
इन तन्हाइयों में तो हूं
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







