जीना है तो जीवन के हर दुख को सहना होगा,
जैसे ईश्वर रखता है वैसे ही रहना होगा।
जो न कभी सोचा था मन में
हो जाता है वह जीवन में,
अच्छा बुरा समय आता है
महलों कुटियों के आंगन में।
टूटे दिल की हर धड़कन से ये सब कहना होगा,
जैसे ईश्वर रखता है वैसे ही रहना होगा।
सुख की सुबह सुहानी लगतीं,
रातें शरद पूर्णिमा लगतीं।
दुख की दुपहर आग उगलतीं,
दुख की रातें बूढीं लगतीं ।
थके पगों से हिम्मत कर चलने की कहना होगा,
जैसे ईश्वर रखता है वैसे ही रहना होगा।
गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर
सर्वाधिकार सुरक्षित रचनाकार


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







