सच अक्सर मीठा नहीं होता,
पर जीवन का आईना
कभी झूठ नहीं बोलता।
बारिश थमते ही
छाता दीवार के सहारे टिका दिया जाता है,
चलना सहज होते ही
लाठी किसी कोने में रख दी जाती है,
और सवेरा होते ही
मोमबत्ती की लौ
खुद ही अप्रासंगिक हो जाती है।
शायद यही संसार का स्वभाव है—
यह अक्सर
मनुष्य का नहीं,
उसकी उपयोगिता का सम्मान करता है।
फिर भी
कुछ लोग ऐसे होते हैं
जो बिना किसी प्रतिफल की चाह के
गिरते हुए को थाम लेते हैं,
रोते हुए को मुस्कान दे जाते हैं,
और दूसरों के अँधेरों में
अपने हिस्से की रोशनी छोड़ जाते हैं।
यदि कभी
तुम्हें भी
छाते, लाठी
या मोमबत्ती की तरह
भुला दिया जाए,
तो निराश मत होना।
क्योंकि
चरित्र का मूल्य
उपयोग से नहीं आँका जाता।
सच्ची रोशनी
तालियों की मोहताज नहीं होती,
और सच्ची वफ़ा
पहचान नहीं,
आत्मा पर अपनी छाप छोड़ जाती है।
अंततः,
यह याद नहीं रहता
कि किसने कितना काम किया,
बल्कि यह याद रहता है—
सबसे घने अँधेरे में
किसने
बिना शर्त
उसके भीतर
एक दीप जला दिया था।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







