कभी मैं भी थी चाँद के जैसी तुम्हारी जुबान से।
तूँ क्या गया 'उपदेश' ख्वाबो में डुबाया जान से।।
तुम्हारी आदत याद करती तो हो जाती बरसात।
गाल भींग जाते दोस्ती करना चाहते अनजान से।।
प्रेम ईश्वर की भाषा अगर तो कोशिश इंसान की।
बिना रिश्ते रिवाजों के मैं जीना चाहती शान से।।
आसमान से गिरते झरने में खोना चाहती 'उपदेश'।
ठहरा दरिया नही होना चाहती अपने अरमान से।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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