दूर क्षितिज की उस पहाड़ी पर मुस्कुरा रहे हैं आप,
मेरी बगिया के गुलाबों में भी खिल रहे हैं आप।
मेरे सिरहाने बैठ प्यार से मुझे देख रहे कभी,
कभी मेरे बालों को सहलाकर मुझे सुला रहे हैं आप।
झांका अपने दिल में तो प्यार की पाठशाला लगा रहे हैं आप,
देखा जो आईना तो आंखों में हॅंसते हुए दिख रहे हैं आप।
मीलों दूर बैठे प्यार का पाठ पढ़ा रहे हैं मुझे कभी,
कभी पास ही अपने होने का आभास दिला रहे हैं आप।
सुना ध्यान लगा तो मेरी धड़कनों में कुछ गुनगुना रहे हैं आप,
देखा आंखों को बंद कर तो दिल में पहरा लगा रहे हैं आप।
कभी मीरा को तो कभी राधा कृष्ण को लिख रहे,
कभी हमारे ही इश्क़ की अनूठी दास्तां को
महफ़िल - महफ़िल सुना रहे हैं आप।
✍️रीना कुमारी प्रजापत ✍️
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







