सूरज जब उत्तर दिशा की ओर
अपनी यात्रा बदलता है,
तो अंधेरों के बीच
उजालों का भरोसा पलता है।
कुहासे की चादर ओढ़े
धरती मुस्कुराने लगती है,
ठंडी हवाओं में भी
नई ऋतु की आहट जगती है।
खेतों में पकती फसल
मेहनत का मान बढ़ाती है,
किसान के सूखे हाथों में
आशा की रेखा खिंच जाती है।
तिल और गुड़ की मिठास में
जीवन का संदेश छिपा है—
कठोरता में भी अपनापन,
और वाणी में मधुरता सिखा है।
नीले आकाश में पतंगें
सपनों-सी उड़ान भरती हैं,
हर डोर सिखाती है
संयम से ऊँचाइयाँ चढ़ती हैं।
घर-आँगन में हँसी गूँजती,
रिश्तों में फिर से जान आती,
भूली रंजिशें पिघलाकर
सौहार्द की धूप छा जाती।
मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं,
यह जीवन का दर्शन है,
पुराने बोझ उतार फेंको—
यही नव-आरंभ का स्पर्शन है।
यह दिन कहता है हमसे—
बाँटो खुशियाँ, बाँटो मान,
मेहनत, प्रेम और विश्वास से
रचो एक बेहतर इंसान।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







