प्रत्येक परिस्थिति को गले लगाना,
उसे स्वीकार कर आत्मसात कर लेना
एक ऐसी कला है
जिसे चाहकर भी नहीं सीखा जा सकता,
न ही समझकर कंठस्थ किया जा सकता है।
यह वह अध्ययन है,
जिसे जानते सब हैं,
पर अभ्यास में लाना कठिन होता है।
हुनर की यह ऐसी सीमा है
जिसे पार करने वाला कोई विरला ही होता है।
पर जो इस कला को साध लेता है,
उसका जीवन स्वाति की उस बूँद-सा हो जाता है
जो सीप पर गिरे तो मोती बना दे,
और केले के पत्ते पर गिरे तो कपूर।
वह विरला जहाँ खड़ा हो जाए,
व्यक्ति, वस्तु और स्थान
सबको अनमोल बना देता है।
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







