हर पतंग की होती है एक चाहत,
ऊँचे उड़ आसमान को छू जाना,
खुले नीले आकाश में
अपने सपनों को आज़माना।
अंत का भी पता है उसको,
फिर भी उड़ना नहीं छोड़ती,
जानती है कटेगी एक दिन
फिर भी हौसलों से नाता नहीं तोड़ती।
मांझे की धार से कटकर
धरती पर गिर जाना तय है,
फिर भी ऊँचाई की लालसा
उसके मन में अडिग और अटल है।
ऊँचे उड़ने का हौसला उसका
कभी कम नहीं होता,
हार और गिरावट का डर,
विश्वास को जकड़ नहीं पाता।
दूसरी पतंग से कटकर
धरती पर आ गिरे तो भी,
उस टूटन में कोई ग़म नहीं होता,
क्योंकि उड़ने का साहस
कभी व्यर्थ नहीं होता।
वह सिखाती है इंसान को भी
जीने का सच्चा सार,
गिरने से पहले ऊँचा उड़ना
ही है जीवन का उपहार।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







