हमने किसी को खोया नहीं,
बस उसकी उम्मीदों से आज़ाद हुए हैं।
जिसे अपनी दुनिया समझ बैठे थे,
उसी की दुनिया में हम बेनाम हुए हैं।
वो पूछते हैं—अब पहले जैसे क्यों नहीं रहे?
कैसे बताते उन्हें…
पहले हम उन्हें समझते थे,
अब ख़ुद को समझने लगे हैं।
कुछ रिश्ते टूटकर भी नहीं टूटते,
बस दिल में उनकी जगह बदल जाती है…
और कुछ लोग दूर होकर भी दूर नहीं होते,
क्योंकि उनका नाम नहीं_
उनकी ख़ामोशी हमारे अंदर रहती है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







