धर्म की ग्लानि जब हुई तुम प्रकट हुए।
तुमही सृष्टि के रचयिता पालनहार हुए।
अवतरित हो धरा पे अन्याय कैसे देखा।
बोलो माधव बोलो कब तक मौन रहता।
सदा से तुमने सृष्टि को अपना ही कहा।
कैसे फर्क कर सके थे तुम गैर में मुझमे।
पग पग में मैं अपमानित जलील हुआ।
बोलो माधव बोलो कब तक मौन रहता।
राजकन्या आवाहन से पुत्रजन्म दे गयी।
वह जिगर सरिता में प्रवाहित कर आई।
माता कुमाता नही क्या संतान दोषी थी।
बोलो माधव बोलो कब तक मौन रहता।
नियति क्रूर तो होती मगर दयावान भी।
घर सहारा दे पोषित किया सूतपुत्र हुआ।
राजकुमार नेही कद्र कर सन्मान बख्सा।
बोलो माधव बोलो कब तक मौन रहता।
राजा द्रुपद ने ही स्वयंवर रच शर्त रखी।
आमंत्रित मैं भी तो था राजा की भांति।
खून के घूंट पिये थे शुद्र बोल मुझे रोका।
बोलो माधव बोलो कब तक मौन रहता।
इंद्रप्रस्थ महल में ससन्मान आमंत्रित थे।
महल मे मेरे मित्र का भी अपमान किया।
चूप रहा सहा तब भी न कुछ बोल सका।
बोलो माधव बोलो कब तक मौन रहता।
पाण्डव द्युत में अर्धांगिनी कोही हार बैठे।
सभा मे अपमान का मैं तो दोषी नही था।
मौन उपस्थिति का दोषी मुझे माना गया।
बोलो माधव बोलो कब तक मौन रहता।
भुआ तुम्हारी प्राण मांग गई ना न किया।
अभयदान देकर उस मां को विदा किया।
क्यों गैर समझा कौनसा यह अपराध था।
बोलो माधव बोलो कब तक मौन रहता।
नियत जान भी कवच कुंडल दान किया।
बीच युद्ध इंद्र मांग बैठे नियति मान बैठा।
किसे सुनाता दर्द जब तुमने ही मुंह मोडा।
बोलो माधव बोलो कब तक मौन रहता।
किसमे थी ताकत कौन मुझे हरा सकता।
तक़दीर क्या थी तुमने उसको उकसाया।
युद्ध मे व्याध की भांति अर्जुन मार गया।
बोलो माधव बोलो कब तक मौन रहता।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







