सावन में बरसेंगी बदलियां
बोझ किस गम का न जाने ढो रही हैं बदलियां
दो बूंद धरती पर गिरा कर, क्यूं रो रही हैं बदलियां
आंखों में आंसू छुपा कर, ये कब से बैठी थी गगन में
बेचैन हो कर कब से न जाने, खोई हुई थी बदलियां
क्यूं श्रमिकों को देखकर ये बदल रही हैं अब करवटें
यह दर्दे दिल किस का छुपा कर, आ रही हैं बदलियां
सूर्य की तपती किरण से ये हो रही है यूं बेहाल क्यूं
छुप कर बादलों की ओट में कहां जा रही हैं बदलियां
महसूस क्यूं होती नहीं अब ये तपन इसको धरा की
छिटक कर अब भागती हैं, क्यूं इस गगन से बदलियां
तप रही है ये धरा अब इस आग में जलती चिता सी
कब बुझेगी आग ये कब जल लेकर आएंगी बदलियां
बरसेंगी सावन में बदलियां इन्तजार में बैठे हैं यादव
बारिश की रिमझिम फुहारें, हम पर गिराएंगी बदलियां
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







