परछाई में खोई मुस्कान
चेहरा एक मुस्कान से निखर जाता है,
पर ये सदा चेहरे पर रहती कहाँ है ?
कभी जिम्मेदारियों में कहीं छुप जाती हैं,
तो कभी राहों के बीच कहीं खो जाती हैं ।
बचपन की यादों की तरह,
अब तो बस परछाई में ही झलकती है ।
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







