वक्त,न जाने,कब,किस पर, कहां प्रहार कर दे,
मौसमे - जिंदगी,कब पतझड़,कब बहार कर दे!
सूखा दे,न जाने कब,हमारी सांसों का दरिया
हमारी फिजाएं,कब,गुल- ए- गुलज़ार कर दे!
ले जाए आसमान की ओर,दिली तमन्नाओं को
बाहों में पंख लगाकर, चाहत की उड़ान भर दे!
सहला दे,न जाने कब, हमारी लंबी मायूसी को,
हलक में, ठहाकों की,नयी पावसी बौछार कर दे!
हर वक्त जिंदगी में, सिर्फ वक्त का ही पहरा है,
समझ सकें हम,तो,वक्त हमें समझदार कर दे!
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







