सवाल पर सवाल ही उछाले जायेंगे हरदम
लोग यूं सारे लाजवाब बनाये जायेंगे हरदम
आजाद पिंजरे से उन्हें करने से पहले देखना
पर सारे परिंदो के कुछ तराशे जायेंगे हरदम
कोई अब करता नहीं है यकीन किसी पर भी
झूंठ कुछ कहकर दिल टटोले जायेंगे हरदम
बात बिगड़ी तो मुहब्बत याद आती है सबको
अश्क़ और यादों के जाम ढाले जायेंगे हरदम
कौन रोता है खुदा के वास्ते दुनियां में ए दास
शोर में माला के मनके फिराये जायेंगे हरदम !!


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







