Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

रुलता हुआ मनुष्य - सुरेन्द्र कल्याण बुटाना

रुलता हुआ मनुष्य

रोता हुआ मनुष्य
कभी सड़क पर नहीं मिलता।

वह
अपनी मुस्कानों के पीछे छिपा रहता है।

जो सबसे अधिक हँसता है,
कई बार
उसी की रातें
सबसे अधिक रोती हैं।

समाज ने
हर चेहरे पर
एक मुखौटा रख दिया है।

अब कोई
अपना दुःख
पूरा नहीं कहता।

हर आदमी
थोड़ा-थोड़ा टूटता है,
और थोड़ा-थोड़ा
जीना सीखता है।

समय
उसके बालों में सफेदी भर देता है,
और अनुभव
उसकी आँखों की चमक चुरा लेता है।

फिर भी
वह चलता रहता है।

क्योंकि
घर उसके कंधों पर है।

माँ की दवा,
बेटी की पढ़ाई,
बेटे का भविष्य,
पिता की उम्मीदें—

सब
उसकी साँसों से बँधे होते हैं।

वह
अपने सपनों को
अक्सर
अलमारी के किसी पुराने कोने में रख देता है।

और
दूसरों के सपनों के लिए
पूरी उम्र
मुस्कुराता रहता है।

यही मनुष्य है।

वह
अपनी भूख छिपा सकता है,
अपने आँसू रोक सकता है,
अपने घाव ढक सकता है—

पर
अपने भीतर की करुणा
कभी पूरी तरह नहीं मार सकता।

इसीलिए
जब कहीं
कोई बच्चा रोता है,
कोई किसान हारता है,
कोई सैनिक लौटकर नहीं आता,
कोई माँ अकेली रह जाती है—

तब
मनुष्य का हृदय
अब भी काँप उठता है।

यही आशा है।

यही भविष्य है।

और यही कारण है
कि मैं आज भी मानता हूँ—

जब तक
एक भी मनुष्य
दूसरे मनुष्य के लिए रो सकता है,

तब तक
मानवता जीवित है।




सुरेन्द्र कल्याण बुटाना हिन्दी एवं हरियाणवी साहित्य के सक्रिय कवि, लेखक, कथाकार और साहित्यकार हैं। उनकी लेखनी का मूल केंद्र मानव जीवन, मानवीय संवेदनाएँ, प्रेम, विरह, रिश्ते, सामाजिक यथार्थ, ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति, आत्मसम्मान और बदलते सामाजिक परिवेश हैं। वे साहित्य को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संवेदना और मानवीय मूल्यों के संरक्षण का सशक्त साधन मानते हैं।

वे कविता, कहानी, लघुकथा, लेख और सामाजिक विषयों पर निरंतर लेखन कर रहे हैं। उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली और जीवन के निकट है, जिसके कारण उनकी रचनाएँ पाठकों के हृदय तक सहजता से पहुँचती हैं।

सुरेन्द्र कल्याण बुटाना की प्रकाशित कृतियों में "समाज" (हरियाणवी काव्य संग्रह) तथा "प्रतिज्ञा दोस्ताना (गज़ब दोस्ताना)" (हिन्दी कहानी संग्रह) प्रमुख हैं। उनकी रचनाएँ अमर उजाला काव्य, रचनाकार, साहित्य कुंज, हमारी वाणी, सारा सच, प्रतिरूप मीडिया, हिन्दी कविता, हिन्दी रक्षक, दैनिक साहित्य, बहुजन पत्रिका तथा अन्य साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित होती रही हैं।

वे कलम संवाद ई-पत्रिका के सह-संपादक (Co-Editor) हैं तथा कवि और कलम साहित्यिक मंच से जुड़े हुए हैं, जहाँ वे कवि सम्मेलनों, ओपन माइक, साहित्यिक कार्यक्रमों और हिन्दी-हरियाणवी साहित्य के प्रचार-प्रसार में सक्रिय योगदान देते हैं।

उनकी साहित्यिक दृष्टि मनुष्य और समाज के बीच संवाद स्थापित करने पर आधारित है। वे मानते हैं कि साहित्य का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को मनुष्य से जोड़ना, संवेदनाओं को जीवित रखना और समाज को सकारात्मक दिशा देना है।

उनकी साहित्यिक पहचान उनकी इस पंक्ति से भी जुड़ती है—

"कलम जब ताकत बन जाए, तब कलम भविष्य लिखती है।"




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (2)

+

कृष्णा शर्मा said

बहुत ही खूबसूरत रचना 👏👏👏
सादर प्रणाम 🙏

रीना कुमारी प्रजापत said

Bahut badhiya.... Humare likhantu pariwar mein aapka bahut bahut swagat hai

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