प्रार्थना का समय हो रहा है,
हो जहां भी चले आइयेगा।
राम जी अब तो आइयेगा।
मैंने अंखियों को सरयू बनाया,
तुम्हरी मूर्ति को उसमें नहलाया,
वंदना का समय हो रहा है,
अपने आसन पै आ जाइयेगा।
सज गई मेरी पूजा की थाली,
जगह इसमें तुम्हरी ही खाली,
आरती का समय हो रहा है,
दीप की लौ मैं आ जाइयेगा।
राम जी तुम चले आइयेगा।
सोने चांदी की खटिया बनाई,
चांदनी की चदरिया बिछाई,
सोने का अब समय हो गया है,
मेरे सपनों में आ जाइयेगा।
राम जी तुम चले आइयेगा।
सूर्य की रोशनी जग गई है,
मेरे प्रभु अब सुबह हो गई है,
ध्यान का अब समय हो गया,
बंद आंखों में आ जाइयेगा।
राम जी तुम चले आइयेगा।
पैर धड़कन के थकने लगे हैं,
दीप अंखियों के बुझने लगे हैं,
लौटने का समय हो रहा है,
अपने संग हमको ले जाइयेगा।
राम जी तुम चले आइयेगा।
गीतकार-अनिल भारद्वाज एडवोकेट,हाई कोर्ट ग्वालियर मध्य प्रदेश।
सर्वाधिक विकास सुरक्षित


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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