प्रेम होना एक मानसिक प्रशिक्षण है,
जिसमें मनुष्य अपने भीतर की,
भावनाओं के शिशु काल से लेकर वृद्धावस्था को देखता,
सामंजस्य बिठाता है,
प्रेम ही पहली भावना है,
जिससे मनुष्य अपने भीतर प्रवेश करता है,
प्रेम करते वक्त मनुष्य सबसे शांत होता है।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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