ठोकर लगी तो गिरेंगे मगर खुद ही हम उठ जाएंगे
इंसा हैं शीशा नहीं जो किरचा हो बिखर जायेंगे
ये ओहदा ये शोहरत और इन रिसालों की सुर्खियां
बेवफा की मानिंद आखिर चुपचाप निकल जायेंगे
ज़ब कहीं फूल खिलेगें सारी फ़िजा ये महक उठेगी
लोग पागल की तरह तेरे दामन से लिपट जायेंगे
एक दिन लगता है कोई कयामत तो जरूर आएगी
अगर जमीन पर इस कदर बारूद बिखर जायेंगे
दास हमारी राह में क्यूँ कांटे बिछाकर हँस रहे हो
पाँव नंगे हैं तो क्या हमारे हौसले भी मर जायेंगे. .


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







